रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है और ये कब से शुरू हुआ है | Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai

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रक्षा बंधन हिन्दू धर्म में एक प्रमुख पर्व है जो भाई और बहन के बीच संबंध की महत्वपूर्णता को दर्शाता है। यह त्योहार हिंदी कैलेंडर के अनुसार शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को आषाढ़ मास में मनाया जाता है, जिसका मतलब होता है कि यह जुलाई या अगस्त के महीने में पड़ता है।

रक्षा बंधन की कहानी महाभारत महाकाव्य से जुड़ी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कहानी है किंग कर्ण और उसकी माता कुंती के बीच के संबंधों की है। कर्ण को जन्मता समय पर विद्या नहीं मिली थी, और उसने अपने जीवन में कई मुश्किलें का सामना किया। फिर भी, उसकी माता कुंती ने उसे पहचानने की कभी भी कोशिश नहीं की। एक दिन, कर्ण ने अपनी माता को याद किया और उसकी ख्वाहिश पर वर देने के लिए सूर्य और चंद्रमा का आग्रह किया। माता कुंती ने उसके इस आग्रह को पूरा करने के लिए उसे आशीर्वाद दिया कि वह किसी भी समय उनकी मदद के लिए आ सकता है, चाहे वो जब भी हो।

यह किस्सा भाई-बहन के प्रेम और संरक्षण के महत्व को दर्शाता है और रक्षा बंधन इसी कथा के आधार पर मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई अपनी बहन को उपहार देता है, साथ ही उन्हें आशीर्वाद देता है कि वह हमेशा सुरक्षित और खुश रहें।

आजकल, यह पर्व समाज में एक मानवीय भावना का प्रतीक बन गया है और भाई-बहन के प्यार को मजबूती से जोड़ता है।

रक्षा बंधन का इतिहास

रक्षा बंधन का ऐतिहासिक महत्व हिन्दू धर्म और संस्कृति में है। यह पर्व भाई-बहन के प्यार और संरक्षण के महत्वपूर्ण संदेश को साझा करने का एक माध्यम है।

रक्षा बंधन का उल्लेख महाभारत महाकाव्य में होता है। इसकी एक प्रमुख कथा महाभारत के अनुशासन पर्व में ‘अंबा, अंबिका और अंबालिका’ के नाम से मिलती है।

महाभारत के अनुशासन पर्व में, राजा शंतनु अपने आदर्शवादी और धर्मप्रिय रूप के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें गंगा नदी के राजा गंगाधर की शापित पत्नी बनने का आदर मिला था। गंगा ने उनसे कहा था कि वे तीन पुत्र प्राप्त करेंगे, लेकिन उन्हें उनके सभी पुत्रों के उद्धारण के लिए तैयार रहना होगा।

शंतनु ने अपने पत्नी गंगा से विवाह किया और उन्हें तीन पुत्र प्राप्त हुए, लेकिन गंगा ने सभी को उसके पास ले गई और शंतनु को उनके साथ नहीं रहने दिया। इसके बाद, शंतनु ने अपनी दूसरी पत्नी सत्यवती से भी तीन पुत्र प्राप्त किए, जिनमें भीष्म पितामह श्रेष्ठ थे।

गंगा की परिक्रिया के बाद, उनकी पुत्री अंबा को राजमहल लौटाया गया लेकिन उसका कोई सहाय्यक नहीं था। उसने भीष्म से सहायता मांगी लेकिन वह अपने प्रतिज्ञान के कारण उसे उधार नहीं दे सकते थे। इसके परिणामस्वरूप, अंबा ने श्रीकृष्ण से मदद मांगने का निर्णय लिया और उन्होंने अपने पितृवध की दिशा में तपस्या आरंभ की। उसने भगवान परशुराम से भी उपाय पूछने का प्रयास किया, लेकिन वे भीष्म के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करना चाहते थे।

इस प्रकार, अंबा की कथा महाभारत में रक्षा बंधन के पर्व के पीछे का संदेश देती है, जिसमें एक बहन अपने भाई की सुरक्षा के लिए विशेष प्रकार की आवश्यकता में होती है और उसके लिए वह किसी भी संकट का सामना कर सकती है।

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हिन्दू परंपराओं में रक्षा बंधन

हिन्दू परंपराओं में रक्षा बंधन एक महत्वपूर्ण और प्रिय पर्व है। यह पर्व भाई-बहन के प्यार और संरक्षण के आदर्शों को साझा करता है और उनके बीच के अटूट बंधन की महत्वपूर्णता को प्रकट करता है।

रक्षा बंधन का मतलब होता है ‘रक्षा की बंधन’ या ‘सुरक्षा का बंधन’। इस दिन, बहन अपने भाई की कलाई पर एक विशेष धागा या राखी बांधती है, जिससे वह अपने भाई की सुरक्षा और दुर्गति से उसके परे रहने की कामना करती है। भाई बहन के ह्रदय में एक अद्वितीय और गहरा बंधन होता है, और यह पर्व उनके प्यार और समर्पण की प्रतीक होता है।

रक्षा बंधन के दिन, बहन अपने भाई को राखी बांधकर उन्हें मिठाइयाँ खिलाती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं कि वे हमेशा सुरक्षित और सफल रहें। भाई भी अपनी बहन को उपहार देते हैं और उनके प्रति अपनी प्रेम भावना को व्यक्त करते हैं। यह दिन परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और समर्पण की भावना को मजबूत करता है और उनके बीच की मजबूत बंधन को और भी गहरा बनाता है।

इस पर्व के माध्यम से हिन्दू संस्कृति में भाई-बहन के संबंध की महत्वपूर्णता को उजागर किया जाता है और यह उनके प्यार और साथीपन का प्रतीक बनता है।

राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

रक्षा बंधन राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हो सकता है “एकता में विश्वास” या “एकता की शक्ति” का संकेत, जिससे दिखता है कि एक समूह या राष्ट्र जोड़कर अत्यंत मजबूत होता है। इसके रूप में, एक अद्वितीय चिन्ह जो विभिन्न तत्त्वों को मिलाकर एक शक्तिशाली समूह का दर्शन कराता है, राष्ट्रीय एकता को प्रतिनिधित्व करता है।

विभिन्न धर्मों और समुदायों में रक्षा बंधन का महत्व: रक्षा बंधन विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में महत्वपूर्ण है। हिन्दू धर्म में, यह भाई-बहन के संबंध की महत्वपूर्णता को दर्शाता है और उनके प्यार और साथीपन को बढ़ावा देता है। इसे ‘रक्षा बंधन’ के रूप में मनाया जाता है, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसे उपहार देता है, साथ ही आशीर्वाद भी देता है कि वह हमेशा सुरक्षित और खुश रहे।

सामाजिक समरसता की दिशा में योगदान: रक्षा बंधन एक ऐसा पर्व है जो सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान करता है। इसे भाई-बहन के संबंध के प्रति गहरी श्रद्धा और सामर्थ्य की ओर इशारा मानने वाला एक विशेष अवसर माना जाता है। यह समाज में सद्भावना, समरसता और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करता है और व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर एकता की महत्वपूर्णता को प्रमोट करता है।

इस प्रकार, रक्षा बंधन एक समृद्ध और सहमत समाज की दिशा में योगदान करता है और राष्ट्रीय एकता की महत्वपूर्णता को बढ़ावा देता है।

रक्षा बंधन की परंपराएं और रिवाज

रक्षा बंधन भारतीय संस्कृति में एक प्रमुख पर्व है, जिसमें भाई-बहन के प्यार और साथीपन की महत्वपूर्णता को प्रकट किया जाता है। यह पर्व भारत में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है और विभिन्न परंपराओं और क्षेत्रों में अलग-अलग रिवाजों के साथ आता है।

यहां कुछ प्रमुख राज्यों और क्षेत्रों में रक्षा बंधन की परंपराएं और रिवाजों का उल्लेख किया गया है:

  1. पंजाब: पंजाब में रक्षा बंधन को “राखड़ी” के नाम से जाना जाता है। इस दिन, बहन अपने भाई की कलाई पर राखड़ी बांधती है और उन्हें बड़े प्यार और आशीर्वाद देती है।
  2. गुजरात: गुजरात में रक्षा बंधन को “किताबी” के नाम से मनाया जाता है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उन्हें बड़े आदर और प्यार से उपहार देती है।
  3. राजस्थान: राजस्थान में रक्षा बंधन को “सलौना” या “सलुन्डी” के नाम से जाना जाता है। इस दिन, बहन अपने भाई के लिए एक स्वर्ण का दांत बनाती है जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रतीक होता है।
  4. महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में रक्षा बंधन को “नारली पूर्णिमा” या “कविती” के नाम से मनाया जाता है। बहन अपने भाई को नारियल देती है जो उनके सुरक्षा और समृद्धि की प्रतीक होता है।

इन प्रमुख परंपराओं के साथ-साथ, भारत के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में रक्षा बंधन के विभिन्न अनूठे रिवाज और आयोजन होते हैं, जो इस पर्व को और भी रंगीन और सामृद्धिक बनाते हैं। यह परंपराएं और रिवाज भारतीय संस्कृति की धरोहर को दर्शाती हैं और लोगों के बीच आपसी समरसता और प्यार को बढ़ावा देती हैं।

आधुनिकता में रक्षा बंधन का स्थान

आधुनिकता की दुनिया में भी रक्षा बंधन का विशेष स्थान है, हालांकि यह परंपरागत रूपों में नहीं हो सकता, लेकिन विचारशीलता और बदलते समय के साथ, इसका मतलब और महत्व बदलते रहे हैं।

आधुनिकता में, लोगों की जीवनशैली और समाज में बदलाव होने के कारण, रक्षा बंधन का मतलब और महत्व भी बदल गया है। आजकल, यह न केवल भाई-बहन के प्यार और संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी समरसता, सहयोग और परिवार के महत्व को भी दर्शाता है।

आधुनिक जीवनशैली में, भाई-बहन के संबंध भी बदल गए हैं। लोग आजकल विभिन्न क्षेत्रों में विद्यमान होते हैं और वे अपने परिवार से दूर रहकर भी एक-दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं। ऐसे में, रक्षा बंधन का मतलब यह दिखाता है कि भाई-बहन के प्यार और समर्थन का आवश्यकता किसी भी समय और किसी भी स्थिति में हो सकता है, चाहे वे जहां भी हों।

साथ ही, रक्षा बंधन आजकल आपसी समरसता को बढ़ावा देने का एक माध्यम भी बन गया है। इस दिन, लोग अपने समाज में उपस्थित सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के बारे में चर्चा करते हैं और समाज में सहयोग देने के तरीके विचार करते हैं।

आधुनिकता में रक्षा बंधन का स्थान यह दिखाता है कि यह पर्व न केवल परंपरागत संबंधों का प्रतीक है, बल्कि यह आजकल के विचारशील और सहयोगपूर्ण समाज की भावनाओं को भी दर्शाता है।

रक्षा बंधन के उपहार और बदलते रुख

रक्षा बंधन के उपहार और इसके बदलते रुखों के बारे में जानकारी:

रक्षा बंधन के उपहार: रक्षा बंधन के मौके पर भाई और बहन एक-दूसरे को उपहार देते हैं, जिससे उनका प्यार और समर्पण व्यक्त होता है। यहां कुछ प्रमुख रक्षा बंधन के उपहारों का उल्लेख किया गया है:

  1. राखी: राखी ही रक्षा बंधन का प्रमुख उपहार होता है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, जो एक सुरक्षा का प्रतीक होती है।
  2. स्वर्ण और चांदी के आभूषण: बहन अपने भाई को स्वर्ण या चांदी के आभूषण भी देती हैं, जैसे कि हार, कड़ा, चूड़ी आदि।
  3. उपहार की बॉक्स: आधुनिकता में, बहन अक्सर उपहार की बॉक्स भरकर देती हैं, जिसमें मिठाई, चॉकलेट, स्नैक्स आदि होते हैं।
  4. वस्त्र और फैशन आइटम्स: कुछ बहनें अपने भाई को वस्त्र या फैशन आइटम्स जैसे कि टी-शर्ट, शर्ट, घड़ी, गहने आदि देती हैं।

रक्षा बंधन के बदलते रुख: आजकल की जीवनशैली और समाज में बदलाव के साथ, रक्षा बंधन के रुख भी बदल रहे हैं:

  1. विचारशीलता: आधुनिकता में, लोग रक्षा बंधन के माध्यम से सामाजिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हैं और आपसी सहयोग का मार्ग प्रस्तुत करते हैं।
  2. वर्गात्मक उपहार: बड़े शहरों में, लोग अक्सर वर्गात्मक उपहारों को पसंद करते हैं, जैसे कि गैजेट्स, डिजिटल उत्पाद, फैशन आइटम्स आदि।
  3. आपसी समरसता: आधुनिक युग में, लोग अपने समाज में आर्थिक और सामाजिक सहयोग की ओर बढ़ते हुए दिखाई देते हैं, जिससे समाज में सामरसता बढ़ती है।
  4. वर्चुअल रक्षा बंधन: आधुनिकता के चलते, दूर रहने वाले परिवार के सदस्य वर्चुअल माध्यम से भी रक्षा बंधन मनाते हैं, जैसे कि वीडियो कॉल, ऑनलाइन उपहार, सोशल मीडिया पर आपसी आदरणीयता आदि।

इन बदलते रुखों के साथ, रक्षा बंधन आजकल के समय में भी एक महत्वपूर्ण और आदर्शपूर्ण पर्व बना हुआ है, जो न केवल परिवार के सदस्यों के बीच एकता और प्यार की भावनाओं को प्रोत्साहित करता है, बल्कि समाज में सामरसता और सहयोग की महत्वपूर्णता को भी दर्शाता है।

रक्षा बंधन के कारण

रक्षा बंधन का मुख्य कारण भाई-बहन के प्यार, साथीपन, और समर्थन की महत्वपूर्णता को मनाना और प्रकट करना होता है। यह पर्व उनके संबंधों की मजबूती को साबित करता है और उनके आपसी आदरणीयता को दर्शाता है।

रक्षा बंधन के कुछ मुख्य कारण हैं:

  1. आपसी समरसता और आदरणीयता: भाई-बहन के बीच एक विशेष आपसी समरसता और आदरणीयता की भावना होती है। रक्षा बंधन के माध्यम से यह दर्शाया जाता है कि उनका आपसी समरसता और प्यार किसी भी मानवीय संबंध से अधिक महत्वपूर्ण है।
  2. संरक्षण की भावना: रक्षा बंधन के माध्यम से बहन अपने भाई के प्रति उनके संरक्षण की भावना को व्यक्त करती हैं। वे उन्हें समर्पित होने और सुरक्षित रहने की आशीर्वाद देती हैं।
  3. परिवार के महत्व का प्रतीक: रक्षा बंधन के माध्यम से परिवार के सदस्यों के बीच एकता और समरसता की महत्वपूर्णता को दिखाया जाता है। यह एक विशेष परिवारिक माहौल बनाने में मदद करता है और सदस्यों के बीच समझदारी और सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
  4. भाई-बहन के संबंध की महत्वपूर्णता: रक्षा बंधन के माध्यम से भाई-बहन के संबंध की महत्वपूर्णता को उजागर किया जाता है। यह दिखाता है कि ये संबंध न केवल नाममात्र होते हैं, बल्कि उनमें आपसी समर्पण, आदर, और सहयोग की भावना होती है।
  5. सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व: रक्षा बंधन एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक पर्व होता है जो भारतीय समृद्धि, सामरसता, और परिवार में सद्गुणों को महत्व देता है।

इन सभी कारणों से, रक्षा बंधन एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भाई-बहन के प्यार और समर्थन की महत्वपूर्णता को स्थापित करता है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।

सामाजिक बदलाव और रक्षा बंधन

सामाजिक बदलाव और रक्षा बंधन के बीच गहरा संबंध होता है। समाज में बदलते समय के साथ, रक्षा बंधन भी अपने अर्थ, मतलब, और प्रकार में बदलाव पाता है।

सामाजिक बदलाव और रक्षा बंधन के संबंध:

  1. वर्ग एवं सामाजिक मानदंडों का परिवर्तन: समाज में वर्ग और सामाजिक मानदंडों के परिवर्तन से रक्षा बंधन के प्रतीक में भी बदलाव आता है। पहले जब वर्ग और जाति के आधार पर व्यक्ति की पहचान होती थी, तब भाई-बहन के संबंध भी उनकी जाति और वर्ग के अनुसार मायने रखते थे। आजकल, समाज में वर्गात्मक भेदभाव कम हो रहा है और इसके साथ ही रक्षा बंधन के परिप्रेक्ष्य में भी यह बदलाव दिखाई देता है।
  2. नगरीकरण और ग्लोबलीकरण: नगरीकरण और ग्लोबलीकरण के साथ, परिवारों के सदस्य आपस में दूर रहने लगते हैं, लेकिन उनके बीच रिश्तों की महत्वपूर्णता बनी रहती है। रक्षा बंधन इस स्थिति को दिखाता है कि दूर रहकर भी भाई-बहन के संबंधों की महत्वपूर्णता समय के साथ बढ़ती ही जा रही है।
  3. समाज में नारी की स्थिति में परिवर्तन: सामाजिक बदलाव के परिणामस्वरूप नारी की स्थिति में भी परिवर्तन आया है। आजकल की नारी सशक्त हो रही है और वे अपने भाई की तरह ही प्रतिस्पर्धी और समर्थ होने की प्रेरणा लेती है। इस संदर्भ में, रक्षा बंधन भी नारी के सामाजिक और आधिकारिक महत्व की पुनरावलोकना करने का मौका देता है।
  4. वैल्यूज और मॉरल शिक्षा की महत्वपूर्णता: सामाजिक बदलाव के साथ ही वैल्यूज और मॉरल शिक्षा की महत्वपूर्णता बढ़ी है। आधुनिकता में, लोग अधिक मानवीय मूल्यों को महत्व देते हैं, और रक्षा बंधन इसी मानवीयता और समरसता की महत्वपूर्ण शिक्षा का हिस्सा है।

इन सामाजिक बदलावों के परिणामस्वरूप, रक्षा बंधन का मतलब और महत्व भी बदलते रहते हैं, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के प्यार, साथीपन, और समर्थन की महत्वपूर्णता को दर्शाना और उनके आपसी संबंधों को मजबूत करना होता है।

निष्कर्ष:

रक्षा बंधन का महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि यह एक परंपरागत पर्व है जो भाई-बहन के प्यार, साथीपन, और समर्थन की महत्वपूर्णता को स्वीकार करता है और उनके संबंधों को मजबूती देता है। यह पर्व उनके आपसी समरसता और आदरणीयता को प्रकट करने का मौका होता है और समाज में सामरसता और सहयोग की महत्वपूर्णता को बढ़ावा देता है। आधुनिक युग में, इस पर्व के संदेश ने समाज में विचारशीलता की ओर प्रेरित किया है और इसे समाज में सहयोग और समरसता की महत्वपूर्ण भूमिका दिलाई है।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न:

रक्षा बंधन क्या होता है और यह कब मनाया जाता है?

रक्षा बंधन एक परंपरागत भारतीय त्योहार है जो भाई-बहन के प्यार और संबंध का प्रतीक होता है। यह हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

रक्षा बंधन का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?

रक्षा बंधन का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि महाभारत में दिखाई गई है, जहां द्रौपदी ने भगवान कृष्ण के साथ रक्षा बंधन किया था।

रक्षा बंधन के पीछे का मुख्य कारण क्या है?

रक्षा बंधन का मुख्य कारण भाई-बहन के प्यार और संबंध को मजबूत करना है, जिससे वे हमेशा एक-दूसरे के साथ खुश और सुरक्षित रह सकें।

रक्षा बंधन के उपहारों में क्या परंतु किया जा सकता है?

रक्षा बंधन के उपहारों में रंगीन राखियाँ, मिठाई, और आकर्षक आभूषण शामिल हो सकते हैं।

क्या रक्षा बंधन केवल बहनों और भाइयों के बीच ही मनाया जा सकता है?

नहीं, रक्षा बंधन केवल बहनों और भाइयों के बीच ही मनाया जाता है, बल्कि यह सभी रिश्तेदारों के बीच भी मनाया जा सकता है।

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